मन को नियंत्रण कैसे और क्यों रखना चाहिए ? (How and why should I keep control on Mind ?)

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मन को नियंत्रण कैसे और क्यों रखना चाहिए ? (How and why should I keep control on Mind ?)

हम आज आपको एक युवक की कहानी सुनाते हैं | ये युवक दुसरे अन्य  युवक जैसा ही था उसके भी सपने थे, जीवन में कुछ पाने कुछ करने की चाह भी थी और  योग्यता भी थी |

लेकिन उसके सपने सिर्फ सपने ही बन कर रह गये | उसे जीवन में कुछ भी प्राप्त नहीं हुआ और देखते ही देखते समय बीतता गया और वो युवक एक दिन उम्र के उस पड़ाव में  पहुच गया, जहाँ पहुंच कर व्यक्ति कुछ करने के लिए के उतना उत्सुक नहीं रह जाता है जितना वो युवावस्था में  होता है |

अब प्रश्न ये उठता है कि आखिर उस युवक के साथ ऐसा क्या हुआ था जो वो अपने जीवन में कुछ नहीं कर पाया ? 

तो इसकी वजह थी उस युवक का मन…

अब आप को ये बड़ा ही अजीब लग रहा होगा की मन की वजह से कोई कैसे अपने जीवन में पिछड़ सकता है |तो चलिए आपको विस्तार से बताते है, दरअसल युवक का अपने मन पर नियंत्रण ही नहीं था जब उसे पढाई करनी होती थी तो उस वक़्त उसके मन से ये आवाज आती थी कि अभी दोस्तों के साथ थोड़े गप्पें मारे और वो अपने मन की सुन लेता था, नतीजा यह निकला कि उसकी पढाई छुट जाती थी और परिणाम अच्छे नहीं आते थे |

इसी प्रकार से उसका मन हमेशा मौज मस्ती करने का करता रहा और वह मन के अनुसार चलता रहा जबकि उस समय उसे सिर्फ अपने करियर पर ध्यान देना चाहिए था |
ऐसे ही वह हर काम अपने मन के अनुसार करता रहा और उसका मन था कि हमेशा उल्टा चलता था | वैसे इसमें मन की भी गलती नहीं है मन की तो फितरत ही है कि वो इंसान को अपने अनुसार चलाना चाहता है | जैसे अगर आप कोई काम कर रहे होते हैं तो उस वक़्त आपका मन आपसे ये कहेगा काम छोडो आराम करो, लेकिन इंसान अपने बुद्धि और विवेक का प्रयोग करके मन को अपने नियंत्रण में रख सकता है और यदि वह मन की सुने जरुर परन्तु करे वही है जो उसे उचित लगता हो ना की मन के अनुसार चलने लगे और यही काम वो युवक नहीं कर पाया जिसका फल उसे भुगतना पड़ा | और ये कहानी किसी एक युवक की नही है, ये कहानी आज के दौर में हर उस युवक की है जो करना तो बहुत कुछ चाहते हैं लेकिन वो बुद्धि से ज्यादा मन की मानते हैं और करते है | मन में उठी हर बात को बुद्धि के तराजू पर रख कर नहीं तौलते हैं |

तो आज हमे इस युवक की कहानी से ये शिक्षा मिलती है कि मन को नियंत्रण कैसे और क्यों रखना चाहिए | मन की बात को सुने जरुर, परन्तु मन की करने से पहले अपने बुद्धि और विवेक का प्रयोग करें और जो बुद्धि कहे उसे ही करने की कोशिश करें तभी आप अपने जीवन में अपनी आशा और उम्मीद के अनुरूप सफलता प्राप्त कर सकेंगे |

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